Wednesday, 14 August 2013

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें ! (Happy Independence Day)

        स्वतंत्रता दिवस एक ऐसा दिन जो अमर शहीदों के बलिदान की याद दिलाता है। जो हमें भारतीय होने का एहसास दिलाता है। आज भी जब उन शहीदों के बलिदान की कहानी याद करता हूँ तो जरूर आँखों में अश्क आ ही जाते हैं। खैर ! ये दिन जितना अमर शहीदों को याद करने का है उतना ही सभी भारतीयों की जीत का जश्न मनाने का भी है। 
कल हम भारतीयों के लिए बहुत ही उत्साह वर्धक और गर्व से परिपूर्ण पर्व है -
          मैं जब छोटा था तो हर 15 अगस्त को मैं स्कूल सुबह - सुबह जाता और अपने स्कूल के प्रिन्सिपल सर को, घर में टीवी में अपने देश के प्रधानमंत्री को लाल क़िले में, और सरकारी दफ्तरों में विभाग प्रमुख द्वारा  अपना राष्ट्रीय ध्वज "तिरंगा" फहराते देखता तो गर्व महसूस करता था कि क्या किस्मत पाई है कि वो लोग अपना "तिरंगा" फहरा रहे हैं। ऐसे में उन लोगों के प्रति सम्मान की भावना और भी बढ़ जाती थी। और ये भी सोचता था कि वो भी खुद में कितना गर्व महसूस करते होंगे कि उन्हे ये सुनहरा मौका मिला है कि देश का तिरंगा इस पावन दिन के लिए फहराने मिल रहा है। 
          पिछली 15 अगस्त 2012 को जब पहली बार मुझे ये सौभाग्य मिला, तो मेरा सीना भी गर्व से फूल गया कि मैं तिरंगा फहरा रहा हूँ। वैसे मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं भी कभी अपने ऑफिस में तिरंगा फहराऊंगा... 
          पर किस्मत ने मुझे भी वही सम्मान दिया जिसकी मैं कल्पना दूसरों के लिए किया करता था या यूं कहूँ के खुद तिरंगे ने मुझे इसके लिए चुना है, फिर चाहे बहाना कुछ भी हो। 
कल 15 अगस्त 2013 को फिर मैं अपने ऑफिस मे तिरंगा फहराऊंगा तीसरी बार। सोच कर ही अजीब सी खुशी महसूस हो रही है। :)
तो दोस्तों !
         कल की कहानी कल सुनाऊँगा, हो सकता है कि हर रोज की तरह कल फिर कोई नया अनुभव मिले... 
जाते - जाते स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ बस इतना कहना चाहूँगा कि - 

वो मंज़र भी बड़ा अजीब होता है, 
जब कोई अपने देश के लिए शहीद होता है... 
यूं तो हर किसी को ये मुकाम नहीं मिलता माही !
देश पे मर मिटने वाला बहुत खुशनसीब होता है...

जय हिन्द दोस्तों !

Saturday, 23 March 2013

छूट या लूट ... ?

छूट ... 
छूट ...
छूट ...

इस छूट ने अच्छे - अच्छे सरकारी विभागों को आज लिया है लूट ... 

जी हाँ !
आज सरकार ने अपने ही कई विभागों में छूट का प्रावधान रख के उन विभागों के लिए नर्क के द्वार खोल दिए हैं। बस चंद वोट की खातिर आम जनता को पंगु तथा बेईमान बना रही है आज सरकार। मैं अन्य सरकारी विभागों के बारे में तो ज्यादा नहीं बता सकता मगर मैं जिस विभाग से हूँ उसमे तो सरकार ने तो हद कर के  रखी है। बिजली ... किसी भी देश, प्रदेश की रीढ़ की हड्डी कहलाती है क्योंकि बिन बिजली कोई भी देश विकास नहीं कर सकता, और आज के दौर में तो फसलें भी बिना बिजली के पैदा नहीं होती। और आज हमारे देश में अगर कोई प्रदेश सरकार गिरती है तो मुख्य मुद्दा बिजली का ही होता है। इसी कारण कुछ दिनों पहले हमारे प्रदेश के मुख्य मंत्री जी ने किसानो के बिलों पे सरचार्ज माफ़ कर के ५० % बिल माफ़ करने की घोषणा कर दी, जाने क्या सोचा और घोषणा कर दी। ये भी नहीं सोचा की ये मार्च है, वित्तीय वर्ष का अंतिम महिना। इसमें बिजली बिल माफ़ करने की घोषणा बिना किसी लिखित आदेश के करना बिजली के अधिकारीयों की कमर तोड़ देने के बराबर है। 
उधर उच्चाधिकारी ये चाहते हैं कि गत वर्ष जो बिजली के बिल जमा हुए थे, उससे कई गुना ज्यादा बिल इस बार आना चाहिए। अब जब सीएम साहब ने घोषणा कर ही दी तो क्यों कोई अपना पूरा बिल जमा करेगा ? 
और तो और जो व्यक्ति हर महीने अपना बिल जमा कर रहा है वो भी अब कहता है कि चोरों को रियायत और हमको कुछ भी नहीं ? ये कैसा न्याय है ? 
सच है ये, कि अगर कोई व्यक्ति ईमानदारी से हर माह अपना बिल भरता आ रहा है तो उसे प्रोत्साहन के तौर पे कोई रियायत नहीं दी जाती, पर अगर कोई व्यक्ति जानबूझ कर या किन्ही कारणों से अपना बिजली का बिल नहीं जमा कर पता तो एक साथ जमा कर ने पर उसे छूट दी जाती है। 
कहते हैं की सुविधाएँ इंसान को नाकारा और पंगु बना देती हैं, और आज ऐसा ही कुछ भविष्य मैं इस देश को बनाने वाले किसानो का भी देख रहा हूँ। 
किसान छूट के चक्कर में बिल नहीं भरता, और नेता लोग ऐसे चोर, कामचोर, बेईमान किसानो को छूट पे छूट दे दे के वोट लिए पड़े हैं पर किसी ने भी ये नहीं सोचा कि इन छूट की योजनाओं से, बेतुकी व बेबुनियादी घोषणाओं से किस का भला कर रहे हैं ? इस देश का या खुद का ?

- इंजी० महेश बारमाटे "माही"

Thursday, 24 January 2013

I love you... virtually ! ;-)

I Love You !


कितना आसान सा लगता है आज कल ये शब्द किसी से कहना, है न ?
नहीं?
क्यों?
यार एक बार कह के तो देखो किसी को, अगर एक्सेप्ट कर लिया तो फिर बहुत आसान सा लगने लगेगा। यार मालूम है कि मैं जो कह रहा हूँ वो तुमको मजाक लग रहा होगा, क्योंकि ये वर्ड्स हैं ही ऐसे। कई बार ये शब्द किसी से कहना बहुत कठिन हो जाते हैं (ख़ास कर तब जब पहली - पहली बार कहा जाए). मगर आज ये 3 शव्द बहुत आसान से हो गए हैं, जिसे देखो वो ही इनका जब चाहे यूँ ही उपयोग करे पड़ा है। 
कैसे ?

Thursday, 10 January 2013

आप देंगे न मेरा साथ ? (Welcome to me)

दोस्तों !
बहुत दिनों बाद आया हूँ, क्या करूँ ? ब्लॉग्गिंग छोड़ना नहीं चाहता था पर मेरे जॉब ने मुझे ऐसे मुकाम पे ला फेका कि इन्टरनेट से दूर ही हो गया था मैं। नेट ऑन  करता तो बस इ-मेल देखने के लिए... क्योंकि ब्लॉग्स्पॉट  तो लो स्पीड इंटरनेट पे वर्क ही नहीं करता।
पर एक ब्लॉगर को तो बस इन्टरनेट चाहिए कहीं से भी...
और मैंने भी वही किया, बस बीएसएनएल ब्रॉडबैंड की संभावनाओं को तलाशा और इस गाँव में भी पा लिया ब्रॉडबैंड... अब मैं फिर से ब्लॉगिंग मे आ गया...
मुझे आज भी याद है जब मैं रात रात भर ब्लॉगिंग में अपनी नींदे भूल जाया करता था...
मैंने हिन्दी ब्लॉगिंग गाइड के लिए जो कार्य शुरू किया था वो आज भी अधूरा ही लगता है।
मैं ब्लॉगिंग की दुनिया दूर चला गया तो आप लोग भूल गए होंगे मुझे, है न ? 
चलो कोई बात नहीं,
अब फिर से आप सभी के दिलों में जगह बनानी है, 
मेरे पास अब भी बहुत सी नयी कवितायें और नई कहानी हैं... 

तो फिर दोस्तों !
बस एक काम कर दो यार...
मुझे थोड़ी सी,
बस थोड़ी सी ही हिम्मत और आपके प्रोत्साहन की जरूरत है...

आप देंगे न मेरा साथ ?

अपने अगले लेखों में मैं आपको अब तक कि अपनी कहानी जरूर बताऊंगा, क्योंकि ब्लॉगिंग से दूर हो के भी मैंने बहुत कुछ सीखा है... और मध्य प्रदेश के सरकारी घराने के ऐसे परिवार का मैं अब दामाद बन गया हूँ कि जिसके बगैर आज दुनिया की हर सुख सुविधा और जरूरतें नामुमकिन सी लगती है...
और वो घराना है बिजली का... 
जी हाँ ! मैंने अपना एक सपना तो पा ही लिया... चाहा था कि अपने नाम के आगे जो इंजीनियर लिखता हूँ वो सार्थक हो जाये, और देखो; मैं आपकी दुआओं से मैं, अपनी चाहत से, इंजीनियर बन ही गया...
चलो अब बाकी बातें अगली पोस्ट में...

तब तक के लिए करें बस थोड़ा सा इंतज़ार...

- इंजी० महेश बारमाटे "माही"
सहायक प्रबन्धक / कनिष्ठ यंत्री
म॰ प्र॰ मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड