Sunday, 17 April 2011

क्या आज ५५ साल बाद भी भारत में जातिवाद ख़त्म हुआ है ?




२४ मई १९५६, ये वो ऐतिहासिक दिन था जिस दिन डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म को सारे भारत के सामने अपनाया. डॉ. भीमराव अम्बेडकर इनका नाम तो सबने सुना होगा. ये वही शख्स है जिसने हमारे देश के संविधान को एक रूप प्रदान किया था, शायद अब आपको याद आ गया होगा. अब भी ना आया हो तो एक बात और बताना चाहूँगा कि ये वही युग पुरुष हैं जिन्होंने भारत में शूद्र कही जाने वाली "महार" जाति को इस हिन्दू समाज में रहने लायक अधिकार दिलाये. आज सारा बौद्ध समाज उनको याद करता है और उनका आभारी है. उन्होंने एक सपना देखा था कि कोई भी महार या कोई भी नीची जाती वाला व्यक्ति इस हिन्दू प्रधान देश में सिर उठा कर जीये. कहीं कोई जाति के नाम पर छुआछूत न हो. अगर गाँधी जी ने अखंड भारत का सपना देखा था तो उस सपने का एक भाग ये भी था कि भारत में न केवल हिन्दू मुस्लिम एकता हो बल्कि जातिवाद, धर्मवाद भी न हो. यही सपना डॉ. भीमराव अम्बेडकर का भी था. और इस हेतु उन्होंने जो अविस्मर्णीय कार्य किये वो अद्वितीय हैं.
पर क्या आज ५५ साल बाद तक भारत में जातिवाद ख़त्म हुआ है ?

शायद आपका जवाब हाँ होगा. पर मेरा जवाब "" है.
हाँ, ये जरूर कहा जा सकता है कि जातिवाद कम हुआ है पर जड़ से ख़त्म नहीं. आज हमारे देश का दलित वर्ग या ये कहिये हमारे देश का "महार" वर्ग या बौद्ध वर्ग, शिक्षित संपन्न और कुछ हद तक आत्म निर्भर जरुर हो गया है और ये डॉ. भीमराव अम्बेडकर के कार्यों की बहुत बड़ी उपलब्धि भी है. पर आज भी भारत के ऐसे कई भाग हैं जहाँ बौद्ध लोगों को, हरिजनों को तथा अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों को घृणा की नज़रों से देखा जाता है. उनसे दूर से ही बात की जाती है. उनके घर में घुसना या उनके घर का पानी पीना भी पाप है. कुछ ग्रामीण इलाकों में ये हाल है कि वो अगर किसी हैण्ड पम्प पे चले जाए पानी के लिए तो वहाँ पर अगर को हिन्दू जाति का इंसान होगा तो वो अपना सारा पानी फेंक देगा, और जब तक कि वो महार चला न जाए तब तक वहाँ कोई और नहीं आएगा. और फिर क्या है उनके जाने के बाद ही फिर से बाल्टी को माँज कर फिर पानी भरा जाएगा. अब आप ही कहिये क्या सच में जातिवाद इस देश से जा चुका है ? ये कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं थी, ये एक सच्ची घटना थी जिसे मेरे बड़े भाई ने खुद देखा, महसूस किया और सहा है. और मैंने भी अपने दोस्तों के बीच इस बात को महसूस किया है. और मुझे यकीन है कि हर SC या ST जाति के इन्सान ने जीवन में कम से कम एक बार जरूर इस बात को महसूस किया होगा.

आज मुझे गर्व है कि मैं बौद्धिस्ट हूँ. पर इस बात का दुःख भी कि जो धर्म हमारे भारत देश की अपने धरती से जन्म लिया उसे आज भी भारत में घृणा की नज़रों में देखा जाता है. मैं किसी धर्म की बुराई करने या बौद्ध धर्म की अच्छाईयाँ बताने नहीं आया यहाँ. बल्कि इस लिए आया हूँ कि वे लोग जो खुद को बौद्ध समाज का ठेकेदार समझते हैं वो इस बात को जाने कि हम आज भी हरिजन ही हैं. और एक बात ये भी जान लें कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी को हरिजन शब्द से नफरत थी. आज बौद्ध समाज काफी शिक्षित हो गया है, पर अज्ञानता अब भी हम पर हावी है. अगर मेरी बात से सहमत न हो तो कृपया कर बौद्ध धर्म के पंचशील का अच्छी तरह पाठ करें और उनका हिंदी में मतलब जानने कोशिश भी करें. अगर मतलब पता चल जाए तो फिर एक बार अपने अंतर्मन में झाँक कर देखें कि क्या आप पंचशील का पालन करते हैं ? मैं ये इसीलिए कह रहा हूँ ताकि अगर आपने खुद को सुधार लिया तो समाज को और फिर देश को सुधरने में देर नहीं. गौतम बुद्ध ने भी कहा है कि मन कि बुराइयों को मारो, तभी सारे समाज का उद्धार होगा. 

अगर जातिवाद ख़त्म करना है तो पहले खुद तो सुधरो तब समाज और दुसरे समाज पर ऊँगली उठाने लायक बन पाओगे...

आशा है कि लोगों को मेरी बात समझ में जरूर आएगी.
अगली बार मैं बौद्ध धर्म के पंचशील की शिक्षा के साथ आऊंगा, तब तक के लिए मुझे आज्ञा दें... 

महेश बारमाटे
१७ अप्रेल २०११ 

6 comments:

  1. 1-क्या बोद्ध धर्म में भी जातिवाद है ?

    अगर को हिन्दू जाति का इंसान होगा तो वो अपना सारा पानी फेंक देगा, और जब तक कि वो महार चला न जाए
    @हम भी गांव के रहने वाले है हमने तो आजतक ये नहीं देखा |
    SC या ST जाति के इन्सान ने जीवन में कम से कम एक बार जरूर इस बात को महसूस किया होगा.
    @ sc st ये तो हिन्दू धर्म में है आप तो बोद्ध है अब तो इनका पीछा छोडिये

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  2. विचारोत्तेजक आलेख।
    मेरे अनुसार तो यह बिल्कुल खत्म नहीं हुआ है।

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  3. @Ratan singh ji...

    Shayad aapko Sanvidhan ke bare me thoda or padhna padega ki hindu dharm me jo SC,ST hain wo aaj Boddh dharm me convert ho chuke hain... ye baat sach hai ki bouddh dharm me jatiwad nahi... par hindu ye baat kab samjhenge ki hm ab wo Shudra nahi rahe jinka hazaro salo se unhone shoshan kia hai...

    par bahut dhanyawad jo aap mere blog pe aaye...

    dhanyawad manoj ji.. jo aapne mera sath dia

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  4. विचारोत्तेजक आलेख।
    अगर जातिवाद ख़त्म करना है तो पहले खुद तो सुधरो तब समाज और दुसरे समाज पर ऊँगली उठाने लायक बन पाओगे..
    अगर आपने खुद को सुधार लिया तो समाज को और फिर देश को सुधरने में देर नहीं.

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  5. प्रिय माही जी ......

    १. मै आरक्षण के खिलाफ बिलकुल नहीं हूँ
    २. मै जमीन से जुड़ा हुआ और छुआछूत का शिकार भी कई बार हुआ हूँ.
    ३. मै आपकी कविताओं का फैन हूँ.
    ४. कृपया मुझे अपना मोबाईल नम्बर देने की कृपा कर मुझे अनुगृहीत करे ताकि मै आपसे संपर्क कर सकूं , आपसे जुड़ सकूं, प्रचार के माध्यम और गुर जान सकूं. .....

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