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डर की सकारात्मकता

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      एक वैश्विक महामारी ( कोविड 19 या कोरोना वायरस ) के दौर में अकेले बैठे - बैठे आज बस यूं ही याद आया कि कभी मैं डर की वकालत किया करता था, क्योंकि मैंने अक्सर डर को सकारात्मक रूप से आगे रख कर उससे जीत हासिल की है। अब आप सोच रहे होंगे कि मैं क्या बकवास कर रहा हूँ। सच कहूँ, आज मैं कोई बकवास नहीं कर रहा। जब छोटा था, स्कूल में परीक्षा में फेल होने से डरता था, इसीलिए थोड़ी और मेहनत करता था। उस मेहनत के कारण ही मैंने सफलता के कई मुकाम हासिल किए हैं। और मैं डर को कभी बुरा नहीं मानता था, न ही किसी भी बुरी आदत को। क्योंकि अगर बुराई नहीं होगी अच्छाई का भान कैसे होगा। अगर अंधेरा नहीं होगा तो उजाले का महत्व कैसे पता चलेगा? बस मेरी इसी सोच ने अक्सर मुझे आगे बढ़ने को प्रेरित किया है।        आज के दौर में जब सभी देश एक वैश्विक महामारी से लड़ रहे हैं और अपने नागरिकों को इस बीमारी कोरोना वायरस से बचने को बोल रहे हैं तो मुझे लगा कि मैं तो शायद इस से लड़ना पहले से ही जानता हूँ, क्योंकि अब तक वही तो करता आ रहा हूँ। और वो उपाय है - डर ।      क...

जब बाई कहे बाई बाई.. (व्यंग्य)

आज अपनी श्रीमती जी को, जो कि एक गृहिणी होने के साथ - साथ वर्किंग वुमन भी हैं, बड़ी ही बेबसी में देखा हमने। अब पत्नी जी का मिजाज खराब हो तो हम भी कश्मकश में पड़ गए, आखिर हुआ क्या..? ये बात...

आप तो बड़े शौकीन हैं.. (व्यंग्य)

भाई, मैंने अब तक की अपनी ज़िन्दगी में तरह - तरह के शौक रखने वाले देखे हैं, किसी को क्रिकेट देखने का शौक, तो किसी को क्रिकेट खेलने का शौक, किसी को कुछ खाने का शौक, तो किसी को कुछ पीने का शौक, लाखों तरह के शौक पालते हैं लोग। अब हिन्दी के मशहूर व्यंग्यकार "श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी" के व्यंग्यों में कथित " रामभरोसे जी " को ही देख लो, उसे भी सरकार से नई - नई आशाएं रखने का शौक है, पर इस शौक के चलते वो बेचारा लगभग हर बार वोट बैंक की राजनीति में फंस ही जाता है और दूर न जाये, आप मुझे ही देख लो मैंने भी तो लिखने का शौक पाल रखा है। खैर! मेरी छोड़ो..। आदि काल से ही तरह -  तरह के शौक रखना इंसान की फितरत में ही होता आ रहा है, अगर ऐसा न होता तो कोलंबस ने अमेरिका न खोजा होता। मेरे ख्याल से कोलंबस भाई को यात्राएं करने का शौक रहा होगा, और अगर वो भारतीय होता तो घर वाले तो उसे अपनी गली से भी बाहर नहीं जाने देते। उससे हर पल यही पूछते कि तुझे क्या पड़ी है अमेरिका खोजने की, ये काम कोई और नहीं कर सकता क्या? वगैरह वगैरह सवालातों से बेचारे कोलंबस भाई का जीना हराम कर दिया होता। और वो अमेरि...

डिफॉल्टर विद्युत उपभोक्ता दिवस.. (व्यंग्य)

किसी गाँव में दो पति पत्नी के बीच की बातचीत.. "अजी सुनते हो.." "क्या हुआ..?" "अरे! मैंने सुना है कि अपना बिजली का बिल माफ किया जा रहा है.." "क.. क्या.. क्या बात कर रही हो भागवान.." "हाँ! सही कह रही हूँ, अभी जब आप अपने नकारा और निकम्मे दोस्तों के साथ जुआ खेलने बाहर बैठे थे न, तो मैं टीवी पे न्यूज सुन रही थी, उसमे बता रहे थे कि सरकार ने हम जैसे लोगों का बिजली का बिल माफ कर दिया है, और तो और हमारे ऊपर जो पिछले साल अस्थायी मोटर पंप कनेक्शन चलाने पर जो कोर्ट केस बना था, न वो भी माफ कर दिया है सरकार ने।" "अच्छा, और क्या बता रहे थे न्यूज पे..?" "ज्यादा कुछ नहीं बताया बस ये बताया है कि बिल माफी के लिए बिजली ऑफिस जाना पड़ेगा, बिल लेकर.." "अब यार! ये बिल कहाँ से लाऊँ?" " क्यों.. अपने पास बिल नहीं आता क्या?" "अरे! नहीं भागवान, पिछले महीने जब लाइन मैन बिल लेकर आया था तो मैंने उसको बहुत सुनाया कि बिजली तो आती है नहीं तो बिल काहे का, और बहुत गंदी गंदी गालियाँ देकर बिल उसी के मुँह पर फाड़ के फेक दिया था, सह क...

तुम केपीओ हो, केपीओ.. (व्यंग्य)

सदियों से इस देश में निचले वर्ग का शोषण हो रहा है, और अब तो ये रिवाज हो गया है। पहले जाति के नाम पर शोषण होता था, आज गरीबी और पद के नाम पर होता है। अमीरों के द्वारा गरीबों का शोषण तो पहले भी होता ही था और अब भी होता ही है, पर जाने कब से प्रथा सी बन गई है कि आप अगर निचले पद पर हों तो आपका शोषण ऊँचे पद वाले व्यक्ति विशेष जरूर करेंगे। और खास तौर पे हमारे सरकारी विभागों के कार्यालयों में। बात इतनी सी है कि छोटा कर्मचारी अगर शिकायत करेगा तो उसकी सुनेगा कौन? और अगर वह कर्मचारी बाह्य स्त्रोत मेरा मतलब है कि आउट सोर्स से हो तो वो तो कुछ कर ही नहीं सकता, क्योंकि नौकरी जाने का डर तो सबको होता है न।  बाह्य स्त्रोत की बात से याद आया कि आज कल जाने कहाँ से सरकारी विभागों ने फंडा बना रखा है कि कर्मचारियों की कमी को आउट सोर्स के माध्यम से ही भरा जावे। वैसे आउट सोर्स व्यवस्था के बहुत सारे फायदे हैं, कुछ एक बता ही देता हूँ।  पहला तो ये, कि नियमित कर्मचारी को जहाँ मोटी मोटी रकम सैलरी के तौर पे दी जाती थी, वहीं आज आउटसोर्सिंग के माध्यम से 5 गुना कम कीमत में नवीन बेरोजगार युवा पीढ़ी को रोजगार मिल ज...

बड़े दिनों बाद...

आज बहुत दिनों बाद, जब ब्लॉगर की प्रोफ़ाइल देखने का ख्याल आया, तो देखने बैठ गया कि आखिर किन किन ब्लॉग में मैं कभी लिखा करता था। ऐसा लगा जैसे कई पुरानी डायरियों को अलमारी से आज निकाला हो। ऐसे कई ब्लॉग हैं, जो आज भी मेरे बगैर निरंतर लिखे जा रहे हैं, और ऐसे भी कुछ ब्लॉग मिले, जिनमे अब कोई नहीं लिखता। समय की कमी, न जाने कितने प्रतिभावान लेखको, कवियों को वक़्त की धुंध में पीछे छोड़ देती है। पर वक़्त चलता रहता है। निरंतर, हमेशा ही।  शायद आपके मन में ख्याल आ रहा होगा कि आज कैसे मैंने लिखने की सोची ? कैसे इतने दिन बाद वापस ब्लॉगर खोल के अपने ब्लोगों को टटोला ?  हुआ कुछ यूं, कि कल रात हमारे ऑफिस के ओफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप में कुछ लोगों ने मुझे पढ़ा, और उनकी प्रेरणा से आज मैं इस मुकाम पर आया हूँ, के कुछ लिखने को मन करने लगा।  आज बड़े दिनों बाद अपने फेसबुक पेज को देखा, लगा कि यार ये तो न जाने कब से बंद पड़ा है। उसे वापस चालू करने में कुछ परेशानियाँ थीं, तो सोचा एक नया पेज बना लूँ। तो लीजिये, एक नया पेज झटपट बना लिया। चलिये आज आया हूँ तो ये नई खबर दे ही दूँ।  https://www.fac...

ये सफ़र, ज़िन्दगी है।

करीब 2 साल बाद.. आज फिर लिख रहा हूँ। ऐसा लग रहा है जैसे लिखना भूल ही गया था। पर आज जो लिखने वाला हूँ, यक़ीनन आपको जरूर पसंद आएगा। कुछ दिन पूर्व, मैं कुछ चिंताओं से घिरा हुआ था, सोच रहा ...

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें ! (Happy Independence Day)

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        स्वतंत्रता दिवस  एक ऐसा दिन जो अमर शहीदों के बलिदान की याद दिलाता है। जो हमें भारतीय होने का एहसास दिलाता है। आज भी जब उन शहीदों के बलिदान की कहानी याद करता हूँ तो जरूर आँखों में अश्क आ ही जाते हैं। खैर ! ये दिन जितना अमर शहीदों को याद करने का है उतना ही सभी भारतीयों की जीत का जश्न मनाने का भी है।  कल हम भारतीयों के लिए बहुत ही उत्साह वर्धक और गर्व से परिपूर्ण पर्व है -           मैं जब छोटा था तो हर 15 अगस्त को मैं स्कूल सुबह - सुबह जाता और अपने स्कूल के प्रिन्सिपल सर को, घर में टीवी में अपने देश के प्रधानमंत्री को लाल क़िले में, और सरकारी दफ्तरों में विभाग प्रमुख द्वारा  अपना राष्ट्रीय ध्वज "तिरंगा" फहराते देखता तो गर्व महसूस करता था कि क्या किस्मत पाई है कि वो लोग अपना "तिरंगा" फहरा रहे हैं। ऐसे में उन लोगों के प्रति सम्मान की भावना और भी बढ़ जाती थी। और ये भी सोचता था कि वो भी खुद में कितना गर्व महसूस करते होंगे कि उन्हे ये सुनहरा मौका मिला है कि देश का तिरंगा इस पावन दिन के लिए फहराने मिल रहा है।  ...

I love you... virtually ! ;-)

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I Love You ! कितना आसान सा लगता है आज कल ये शब्द किसी से कहना, है न ? नहीं? क्यों? यार एक बार कह के तो देखो किसी को, अगर एक्सेप्ट कर लिया तो फिर बहुत आसान सा लगने लगेगा। यार मालूम है कि मैं जो कह रहा हूँ वो तुमको मजाक लग रहा होगा, क्योंकि ये वर्ड्स हैं ही ऐसे। कई बार ये शब्द किसी से कहना बहुत कठिन हो जाते हैं (ख़ास कर तब जब पहली - पहली बार कहा जाए). मगर आज ये 3 शव्द बहुत आसान से हो गए हैं, जिसे देखो वो ही इनका जब चाहे यूँ ही उपयोग करे पड़ा है।  कैसे ?

हिन्दी ब्लॉगिंग गाइड : मेरी नज़र से (भाग 6)

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हैलो ! कैसे हैं आप लोग ? बहुत दिनों बाद मिल रहे हैं हम लोग, है न ? क्या करूँ, आज कल थोड़ा सा व्यस्त सा हो गया हूँ।  चलो आज मैं आपको अपनी व्यस्तता का कारण बता ही देता हूँ।  अपनी पिछली एक पोस्ट में मैं आपको बोला था कि दो दो खुशखबरियाँ हैं, जिसमे से एक खुशखबरी मैंने आपको बता दी थी कि फेसबुक पे "हिन्दी ब्लॉगिंग गाइड" के पेज को 30 से ज्यादा प्रसंशक मिलने की वजह से उसका अपना फेसबुक यूजर आई डी मिल गया है। और दूसरी बात ये थी कि मेरी नौकरी लग गई है । चूंकि यह नौकरी मुझे पसंद नहीं है पर फिलहाल के लिए काफी है, क्योंकि कुछ नहीं तो ये तो एक पार्टी करने, खुशियों को बांटने का नया बहाना ही है मेरे लिए। अब आप कहेंगे कि नौकरी लाग्ने के बाद भी मैं ऐसा कह रहा हूँ। अजी जनाब ! मेरा उद्देश्य है कि मैं एक इंजीनियर का जॉब पाऊँ, और मुझे मिला है जॉब एक नॉन - टेक्निकल जॉब। म०प्र० राज्य कृषि विपणन बोर्ड में सहायक उप निरीक्षक का पद पा के खुशी तो मिली पर उतनी नहीं जितनी मिलना चाहिए थी। फिर भी आज मैं यह खुशी आप लोगों से बाँट के इसे थोड़ा और बढ़ाना चाहता हूँ।  तो क्या आप मेरी इस खुशी मे मेरा साथ देंगे...