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I love you... virtually ! ;-)

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I Love You ! कितना आसान सा लगता है आज कल ये शब्द किसी से कहना, है न ? नहीं? क्यों? यार एक बार कह के तो देखो किसी को, अगर एक्सेप्ट कर लिया तो फिर बहुत आसान सा लगने लगेगा। यार मालूम है कि मैं जो कह रहा हूँ वो तुमको मजाक लग रहा होगा, क्योंकि ये वर्ड्स हैं ही ऐसे। कई बार ये शब्द किसी से कहना बहुत कठिन हो जाते हैं (ख़ास कर तब जब पहली - पहली बार कहा जाए). मगर आज ये 3 शव्द बहुत आसान से हो गए हैं, जिसे देखो वो ही इनका जब चाहे यूँ ही उपयोग करे पड़ा है।  कैसे ?

बेवफा...

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"ए कता, जो कल तक आकाश के साथ अक्सर दिखाई देती थी, आज तन्हाइयों ने उसे कुछ इस तरह घेर लिया है की दोस्तों की महफ़िल में भी वो अकेली दिखाई देती है. आज वो सच में बहुत अकेली और उदास हो गयी है. कारण है - आकाश की अचानक हुई सड़क दुर्घटना में मौत... एकता और आकाश एक दुसरे को बहुत चाहते थे, एक दुसरे की खातिर जान तक देने को तैयार थे वो दोनों... उन्होंने ने भी प्यार में संग जीने मरने की कसमे खायी थी, मगर होनी को आखिर कौन टाल सकता है ? आज एकता पूरी तरह से टूट चुकी है, लगता है जैसे किसी फूलदार डाली के सारे फूल हवा के एक हल्के से झोंके ने पल भर में ही बिखेर दिए हों.  कल तक एकता को आकाश पर बहुत नाज़ था, क्योंकि एक हिन्दुस्तानी लड़की को जिस तरह के आदर्श लड़के (जीवन साथी के रूप में) जरूरत होती है, वह सब कुछ आकाश में था. न किसी तरह का ऐब और प्यार के अलावा किसी और तरह का नशा. दोनों की जोड़ी भी आदर्श जोड़ी ही लगती थी. पर ये समय........,  न कभी किसी का हुआ है और न ही कभी किसी और का हो पायेगा..." -- कुछ ऐसे ही जज़्बात बयाँ कर रहीं थी, आज अनीता की आँखे, मयूर की तरफ देख कर. ...

मन

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       ये मन भी कितना पागल है, हमेशा किसी न किसी सोच में डूबा रहता है और तो और हमेशा समय और परिस्थिति के विपरीत ही काम करता है. कभी ये अच्छे खासे ग़मगीन माहौल में भी किसी हँसी ठिठोली वाली बात याद करता है, तो कभी ख़ुशी के माहौल में उदास हो जाता है.         कुछ समझ में नहीं आता क्या Chemistry है इस मन की? कभी हमारा 'मन' भरी महफ़िल में भी हमें तन्हा कर देता है, तब हम उस भरी महफ़िल में किसी की कमी महसूस करने लगते हैं और इसी को हम प्यार समझने लगते हैं, पर मेरे ख्याल से प्यार सिर्फ किसी की कमी महसूस करना ही नहीं होता, प्यार तो वो होता है, जिसको परिभाषित कर पाना मुश्किल ही नहीं, वरन नामुमकिन भी है, क्योंकि आज तक इसे किसी ने भी सही तरह से परिभाषित नहीं कर पाया.  " अरे! ये क्या हो गया,  मैं तो अपनी राह से ही भटक गया,  बात कर रहा था 'मन' की  और  प्यार पर आकर अटक गया. "       आखिर ये सब क्या है? ये तो एक छोटा से खेल है इस मन का. ये मन जो कही भी स्थिर नहीं रहता, इसका एक उदाहरण मैं हूँ. मैंने तो बातों-बातों...