Dhanno, Basanti aur Basant... (धन्नो, बसंती और बसंत)
नमस्कार दोस्तों! बहुत दिनों बाद, कुछ दिल से... लिखने का मन किया... हालांकि मैं अक्सर दिल से ही लिखता हूँ, फिर भी आज सोचा आपसे साझा किया जाये तो बहुत अच्छा होगा। मेरे इस लेख के शीर्षक से आपको सुप्रसिद्ध हिन्दी फीचर फिल्म "शोले " की याद आ गई होगी। और शायद आप सोच रहे होगे कि मैं बीते जमाने की इस सुपरहिट फिल्म के बारे में कुछ नया या फिर कुछ घिसपिटा सा सुनाने वाला हूँ। तो दोस्तों! ऐसा कुछ भी नहीं है। मैं तो आदरणीय व्यंग्यकार, जिन्हे ब्लॉग जगत में सभी जानते हैं, श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी द्वारा रचित व्यंग्य संकलन " धन्नो, बसंती और बसंत " के बारे में अपना अनुभव आपके साथ साझा करना चाहता हूँ। और सच कहूँ तो यह पहला व्यंग्य संकलन है जिसे मैंने पढ़ा है। हालांकि मैंने और भी कई किताबें पढ़ी हैं पर व्यंग्य पहली बार। इस किताब की शुरुआत में ही मुझे हास्य और व्यंग्य दोनों विधाओं में जो सूक्ष्म अंतर है वो समझ में आ गया। डेली हंट ई-बुक्स के एण्ड्रोइड एप के माध्यम से मुझे उनका यह संकलन पढ़ने को मिला। अभी कुछ दिन पहले ही मैंने यह किताब (ई- बुक) डाउनलोड की और अब भी पढ़ ही रहा हू...