Monday, 25 April 2011

पञ्च-शील : गौतम बुद्ध की शिक्षाएं

नमस्कार दोस्तों !

लो आज फिर मैं आ गया. देरी के लिए क्षमा करें क्योंकि मैं किसी काम से बहार गया हुआ था.
जैसा कि मैंने अपने पिछले लेख में कहा था कि मैं आपको बौद्ध धर्म के पञ्च-शील की जानकारी दूँगा, तो लो मैं आज वही ले कर आया हूँ.

यूँ तो लोग बौद्ध धर्म के इन तीन प्रमुख मन्त्रों को जानते ही हैं - 

बुद्धम शरणम् गच्छामि.
धम्मम शरणम् गच्छामि.
संघम शरणम् गच्छामि.

और शायद इनका मतलब भी जानते हैं फिर भी बता देता हूँ - 

मैं बुद्ध की शरण में जाता हूँ.
मैं धर्म की शरण में जाता हूँ, 
मैं संघ की शरण में जाता हूँ.

इन तीन प्रमुख मंत्र शरण - शील कहलाते हैं और इनके अलावा गौतम बुद्ध ने जब अपनी शिक्षाएं सबको देनी चाही तब उन्होंने पञ्च - शील का निर्माण किया. ये वो पांच वचन हैं जो लगभग हर बौद्ध धर्म का अनुयायी जानता है. और इन पञ्च - शील का उच्चारण हर धार्मिक अनुष्ठान के वक्त किया जाता है. ये पञ्च - शील हैं  -
  1. पाणातिपाता वेरमणी सिक्खापदम् समदियामी - मैं जीव हत्या से विरत (दूर) रहूँगा, ऐसा व्रत लेता हूँ.
  2. अदिन्नादाना वेरमणी सिक्खापदम् समदियामी - जो वस्तुएं मुझे दी नहीं गयी हैं उन्हें लेने (या चोरी करने) से मैं विरत रहूँगा, ऐसा व्रत लेता हूँ.
  3. कामेसु मिच्छाचारा  वेरमणी सिक्खापदम् समदियामी - काम (रति क्रिया) में मिथ्याचार करने से मैं विरत रहूँगा ऐसा व्रत लेता हूँ.
  4. मुसावादा वेरमणी सिक्खापदम् समदियामी - झूठ बोलने से मैं विरत रहूँगा, ऐसा व्रत लेता हूँ.
  5. सुरामेरयमज्जपमादट्ठाना वेरमणी सिक्खापदम् समदियामी - मादक द्रव्यों के सेवन से मैं विरत रहूँगा, ऐसा वचन लेता हूँ.
ये पांच वचन बौद्ध धर्म के अतिविशिष्ट वचन हैं और इन्हें हर गृहस्थ इन्सान के लिए बनाया गया था शायद इसी कारण मैंने अक्सर इन पञ्च शील का उच्चारण करते हुए बौद्ध धर्म के अनुयायियों को देखा है. पर विडंम्बना ये है कि करीब 80 - 95 % लोगों को इन पञ्च - शील का अर्थ शायद ही पता हो. अतएव मैंने आज इन पञ्च शीलों को अर्थ समेत यहाँ हिंदी ब्लॉग जगत में ले कर आया हूँ ताकि लोग न केवल इन का उच्चारण करें बल्कि अर्थ समेत अपने जीवन में उतारने का प्रयास भी करें. ये पञ्च - शील प्राचीन पाली भाषा में हैं और मैं इतना ज्ञानवान अभी नहीं हुआ हूँ कि इनका अनुवाद कर सकूँ, इसी कारण मैंने इनका अनुवाद एक बड़ी लोकप्रिय पुस्तक मिलिंदपंह (मिलिंद प्रश्न)  से लिया है. 

संकलन - मिलिंदपंह (मिलिंद प्रश्न) 
अनुवादक - भिक्खु जगदीश काश्यप

मेरा प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा लोग जो आज भारत में बौद्ध धर्म अपना चुके हैं या इसकी ओर आकर्षित हैं वो बुद्ध की शिक्षाओं को अच्छी तरह समझें ओर अपने जीवन में इन्हें उतारने की कोशिश करें  तथा मेरा यह भी प्रयास रहेगा कि चाहे वो किसी भी धर्म के, जाति के या समुदाय के हों, गौतम बुद्ध की शिक्षाएं भारत के हर नागरिक तक पहुंचे.
आशा करता हूँ कि मेरे इस प्रयास से किसी के भी मन मस्तिष्क को किसी भी प्रकार से ठेस नहीं पहुंचेगी.

और आशा करता हूँ मेरा प्रयास मुझे सफलता प्रदान करे...

भवतु सब्ब मंगलं

महेश बारमाटे
25th April 2011


3 comments:

  1. अच्छी बाते बतायी है आपने

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  2. Very good post. I have posted a lot on Buddhism on my blog.

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