Saturday, 9 July 2011

हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड से सम्बंधित लेख मेरी नज़र में...

आज हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड श्रंखला की यह तीसरी कड़ी लिख रहा हूँ... 
आज कुछ भी लिखने से पहले बस यही कहना चाहूँगा कि... 

हजारों ख्वाहिशों को संग लिए,
मन में फिर एक उमंग लिए,
एक बार फिर चल पड़ा है माही
के मंजिल मुझे पुकार रही है...

तो चलो शुरू किया जाए...

आज सबसे पहले आपको बताना चाहूँगा कि हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के अपडेट्स आप फेसबुक (Facebook), लिंक्ड इन (LinkedIn) तथा गूगल ग्रुप्स के साथ - साथ अब ऑरकुट (Orkut) पे भी पा सकते हैं...

जी हाँ, हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड अब ऑरकुट में भी उपलब्ध है...
तो आज ही सदस्य बनें - ऑरकुट में हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड की कम्युनिटी के 
या 
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ऊपर दिए गए लिंक में से किसी भी लिंक पे क्लिक कर के हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के सदस्य बनें... तथा अपने मित्रों को भी शामिल करें...


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चलो अब आते हैं इस चरण के अगले पड़ाव पर... मेरा मतलब है 


हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के लेख व उनकी समीक्षा 

कुछ समझ में नहीं आ रहा कि हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के लेखों की समीक्षा की शुरूआत कहाँ से की जाए ? क्योंकि इसके लिए तो लेख अप्रेल २०११ से ही लिखे जाने लगे थे जब से इसके बारे में घोषणा की गयी थी. पर अब लगता है कि इसकी शुरुआत वहीँ से किया जाए जहाँ से इस विचार की उत्पत्ति हुई...

  • शुरुआत होती है उस लेख से जिसे मैंने २९ अप्रेल २०११ को लिखा और ब्लॉग जगत को कुछ सुझाव दे डाले. यह लेख मैंने वर्तमान में हिंदी ब्लॉग्गिंग को ज्यादा बढ़ावा न मिल पाने की वजह से दिए थे, चूंकि  मैं ब्लॉग्गिंग में नया ही था तो सारे दिग्गज ब्लॉगर को मेरे इस प्रयास से अपनी कुर्सी हिलती हुई दिखाई देने लगी. (क्षमा चाहूँगा यदि किसी को मेरे किसी भी वाक्य से बुरा लगा हो तो). बस फिर क्या था, मेरे उस लेख को मेरे ब्लॉग पे पहली बार १२ कमेंट्स मिले (जिसमे मेरे कमेंट्स भी शामिल हैं) और हिंदी ब्लॉगर फोरम इंटरनेशनल में ९ कमेंट्स मिले. जो मेरे प्रयास से खुश नहीं थे उन्होंने मेरी एक बात को लेकर झगडा सा शुरू कर दिया और जो मेरी बात से सहमत थे उनमे थे - डॉ. अनवर जमाल खान जी, अख्तर खान "अकेला" जी, डॉ. श्याम गुप्ता जी, रोहित जी, विवेक रंजन श्रीवास्तव जी, और कृति जी.. और जो मेरी बात से सहमत नहीं थे उनके नाम ना ही बताऊँ तो बेहतर होगा. अब आप जानना चाहेंगे कि आखिर मैंने ऐसा क्या लिखा कि सभी (खास तौर पे जबलपुरिया) ब्लोगरों को अच्छा नहीं लगा और उनको अपनी कुर्सी हिलने का आभास हुआ? तो लीजिए ये लिंक 

सुझाव : Blogging के बेहतर कल के लिए

  •  इसी लेख के बाद डॉ. अनवर जमाल जी ने हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के प्रकाशन की योजना बनायीं और इसकी घोषणा उन्होंने "ब्लॉग की ख़बरें" ब्लॉग पर. कृपया लिंक देखें - 

हिंदी ब्लॉग्गिंग का भविष्य रौशन करेगी : "हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड"

http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/04/blog-post_7407.html

  • फिर इस श्रंखला में मैंने कुछ और लेख लिखे जिनमे से प्रमुख हैं - 
    • हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड की रूप रेखा
    • http://hbfint.blogspot.com/2011/05/blog-post_5220.html
    • http://meri-mahfil.blogspot.com/2011/05/blog-post_26.html
    • चूंकि अधिकाँश ब्लॉगर ने इसे पढ़ा और अपने विचार व्यक्त किये जिससे यह प्रतीत होता है कि हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड की रूपरेखा सभी को पसंद आई और इसी कारण चर्चामंच ब्लॉग पर भी २८ मई २०११ को इसे प्रस्तुत किया गया. यह रूपरेखा मेरे व डॉ. अनवर जमाल खान जी के दोनों के आपसी विचारों का संगम है, जिसे हमने भली भांति जांचा व परखा है. और इसी रूपरेखा के तहत हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड का प्रकाशन किया जा रहा है. चूंकि अभी भी इसमें कुछ बदलाव किये जा रहे हैं पर रूपरेखा की मुख्य सामग्री बदली नहीं गई है.
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आगे पढ़ें - हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड से सम्बंधित लेख मेरी नज़र में... (भाग २)
पिछले लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें -

  1. हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड : एक नया अध्याय 
  2. हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड : एक नया अध्याय  (भाग २)
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 - महेश बारमाटे "माही"

5 comments:

  1. आप बहुत जानकारी दे रहे हैं और नए नए ग्रुप बनाकर नए नए लोगों को जोड़ रहे हैं . इससे नए लोग ज़रूर ब्लॉगर बनेंगे.

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  2. महेश जी

    नि:संदेह आप अच्छा कार्य कर रहे हैं पर आपके लेखों में घमंड दिखाई देने लगा है थोडा ध्यान रखें,

    मैं पिछले कुछ दिनों से देख रहा हूँ कि आप टिप्पणी को किसी लेख के अच्छा अथवा बुरा होने का प्रमाण मान रहे हैं जो गलत है और आप अपने लेखों पर ज्यादा टिप्पणी चाहते हैं क्यूँ? क्या आपकी लेखनी के अच्छा होने का प्रमाण देती है टिप्पणी?

    मेरे लेखों पर भी कभी २० से ज्यादा कमेन्ट नहीं आये हैं, इसका अर्थ यह नहीं कि मैं लिखना छोड दूँ

    यदि मेरे लेखों से किसी को फायदा होता है तो वो मेरी सफल लेखनी का प्रमाण है, आप हिन्दी ब्लोगिंग गाइड लिख रहे हैं तो जाहिर है टिप्पणी के विषय में आपके जो विचार होंगे वही आप लिखेंगे इसलिए आपको आगाह कर रहा हूँ, लोगों तक गलत सन्देश ना पहुंचाएं, उनको दूसरों के फायदे के लिए लिखना सिखाएं ना को टिप्पणी के लिए

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  3. @योगेन्द्र पाल
    योगेन्द्र जी !
    आपके सुझावों का शुक्रिया !

    पर मैंने यह लेख ऐसी किसी मंसिक्तासे नहीं लिखा था जिसमे घमंड झलकता हो...

    मुझे किसी भी प्रकार का कोई घमंड नहीं कि मैं हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड लिख रहा हूँ तो मेरे लेखों में ज्यादा से ज्यादा कमेंट्स आने चाहिए...

    क्षमा चाहूँगा अगर ये लेख आपको घमंड से प्रेरित लगा... पर मेरा ऐसा कोई आशय न पहले कभी था और नहीं ही कभी रहेगा...

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  4. "लिख रही हूँ ताकि सांस ले सकूँ, जो न कभी खुद से मैंने कहा वो आज कह सकूँ." यूँ तो ऋचा कहते हैं लोग मुझे, पर किसी ने माही नाम दिया है... लोग होश सँभालने के बाद ही लिखना शुरू करते हैं पर मेरी कविताओं ने ही मुझे संवारा है... आज कुछ नहीं बस कहने को एक कहानी हूँ मैं... रहती हूँ बीकानेर में, पर सारा हिंदुस्तान हमारा है... वाह वाह

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  5. @ऋचा....

    ऋचा जी !
    आप मेरी ही लाइन्स को अपने शब्दों में दोहरा रहीं हैं...
    जो भी कहना है साफ साफ़ कहो...
    क्योंकि आपका कहना मुझे समझ में नहीं आया कि क्या कहना चाहती हैं.
    ये आपका मजाक था या और कुछ कृपया स्पष्ट करें...

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