Wednesday, 4 May 2011

ब्लॉग्गिंग के साइड इफेक्ट्स

ब्लॉग्गिंग... 
इसका मतलब तो अब हम सभी जानते हैं... और इससे होने वाले फायदे भी...
तभी मेरे मन में ख्याल आया कि अगर कहीं फायदा है तो नुकसान भी उसके आसपास ही घूमता हुआ मिल ही जायेगा एक न एक दिन. इसीलिए मैं कहता हूँ कि ब्लॉग्गिंग के न केवल फायदे होते हैं बल्कि साइड इफेक्ट्स भी होते हैं. आखिर दोनों एक दूसरे पूरक जो ठैरे... पर साइड इफेक्ट्स से पहले के बार मैं आपको इसके फायदे फिर याद दिलाना चाहता हूँ...
  1. ब्लॉग्गिंग करने से इन्सान में खुद को पहचान सकने की शक्ति का संचार होता है.
  2. अपनी बात दुनिया तक पहुँचाने  का सशक्त माध्यम है ये.
  3. अपनी प्रतिभा को और भी प्रबल करने का नायाब करने का आधुनिक व सबसे सरल तरीका.
  4. कभी-कभी ब्लॉग्गिंग समाज सेवा करने का मौका भी देती है.
  5. नए व अनुभवी लोगों से मिलने का मौका मिलता है, आदि इत्यादि.
और भी कई फायदे हैं ब्लॉग्गिंग के, पर चलो अब ब्लॉग्गिंग के साइड इफेक्ट्स पर भी नज़र डाली जाए. 

ब्लॉग्गिंग के साइड इफेक्ट्स - ब्लॉग्गिंग कोई मेडिसिन तो नहीं फिर ये साइड इफेक्ट्स कैसे ? अजी जनाब ! जब भी हम ब्लॉग पर कोई लेख, कविता वगैरह लिखते हैं तो सबकी दिली इच्छा होती है कि उसके पोस्ट पर बहुत सारे अच्छे - अच्छे कमेंट्स आयें. और यही मनोकामना कभी-कभी साइड इफेक्ट का काम करने लगती हैं. जब हमें हमारी इच्छा के अनुरूप कोई कमेन्ट नहीं आता, या ज्यादा से ज्यादा कमेंट्स नहीं मिलते या आपकी पोस्ट पढने वाले को आपकी पोस्ट पसंद न आये तब निम्न प्रकार के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं.
  1. अवसाद - ये तब होता है जब हमारे लेख को ज्यादा महत्ता नहीं दी जाती या उस पर एक भी कमेंट्स नही दिए जाते. ये इफेक्ट ज्यादातर नवोदित ब्लॉगर को प्रभावित करता है, क्योंकि जब कोई व्यक्ति अपना पहला ब्लॉग बनाता है तो उसे अपनी पहली पोस्ट से ज्यादा अपेक्षाएं होती हैं और वो चाहता है कि उसकी पहली कुछ पोस्ट्स ऐसी हो ताकि पढने वाला पहली बार में उसका फैन हो जाये. पर अक्सर ये होता नहीं. इस चीज से निपटने के लिए आपको अपने मन में दृढ़ इच्छाशक्ति रखनी होगी और संयम व सब्र के भावों को भी अपने मन में उतारना होगा, अन्यथा आप अवसाद से ग्रस्त होके या तो ब्लॉग लिखना बंद कर देंगे या फिर ब्लॉग अनियमित रूप से लिखने लगेंगे.
  2. तनाव - तनाव तो आज इंसानी स्वाभाव हो गया है, हमने दो - तीन पोस्ट लिखे, किसी ने भी हमारे अनुकूल कमेन्ट नहीं दिए तो हम तनाव में आ गए कि आखिर मेरे ही लेखों को सही सराहना क्यों नहीं मिलती. इस चीज से बचने के लिए आपको अपने लेखों को शांतिपूर्वक दोबारा पढना होगा तथा उन पर आये कमेंट्स को भी अच्छी तरह से पढ़ कर खुद में छुपी खामियों को पहचानने की कोशिश करें आपको जरूर लाभ मिलेगा.
  3. शरीर में विटामिन डी की कमी - ज्यादा देर कंप्यूटर के सामने बैठे रहने से आपको सूरज की रौशनी का लाभ बहुत कम मिल पाता है. इसीलिए आपको जरूरी है कि थोड़े देर खुद को रेस्ट देने की जरूरत है. विटामिन डी हमारी हड्डियों के लिए बहुत लाभदायक है और इसका सबसे प्रमुख व मुफ्त स्त्रोत सूरज की रौशनी है. लेखन को जिंदगी मन लेना अच्छी बात है, पर इसी लेखन के कारण ही जिंदगी को गवां देना सही बात नहीं है. इसके साथ कुछ और शारीरिक साइड इफेक्ट्स हैं जैसे कि पीठ का दर्द, आँखों का कमजोर होना, ब्लॉग्गिंग में खो जाने के कारण खाना पीना छोड़ देना इत्यादि.
  4. व्यव्हार में परिवर्तन - ब्लॉग्गिंग से हमारे व्यव्हार में दो तरह के परिवर्तन हो सकते हैं,  १. नकारात्मक तथा २. सकारात्मक. नकारात्मक परिवर्तन के अंतर्गत चिडचिडापन, आपके सोचने के तरीके में बदलाव तथा दोस्तों से दूरी. अब आते हैं सकारात्मक परिवर्तन की ओर, इसके अंतर्गत आने वाले बदलाव हैं - आपकी बदली हुई सोच के कारण आप सम्पूर्ण समाज को एक नयी दिशा देने का काम करने लगना, आपका किसी बातो को अच्छी तरह समझाने का तरीका, अच्छी बातों को सीखने की ललक, अच्छी किताबों व ब्लॉग पढने की आदत इत्यादि.
और भी कई साइड इफेक्ट्स होते हैं ब्लॉग्गिंग के, जिनका अध्ययन करना अभी बाकी है पर फिर भी अगर आप चाहते हैं इस बारे में और जानना तो मेरे पास एक लिंक हैं जिसपे कुछ और भी साइड इफेक्ट्स के बारे में संक्षेप में जानकारी दी गई है.

पर आपसे अंत में मैं इतना ही कहना चाहूँगा कि इन सब साइड इफेक्ट्स को मद्देनज़र रखते हुए आप लिखना कम या बंद न करें. क्योंकि आपकी एक पोस्ट ब्लॉग्गिंग जगत में क्रांति तथा आपकी दुनिया बदल सकती है. आशा करता हूँ कि मेरे द्वारा दी गई इस जानकारी से किसी के मन को ठेस न पहुंची होगी. 

धन्यवाद 

महेश बारमाटे "माही"

5 comments:

  1. बातें तो सभी विचारणीय हैं.... कोशिश की जाये की जाय कि सकारात्मक साइड इफ्फेक्ट ही हों :)

    ReplyDelete
  2. ब्लागर को योगी होना चाहिये... निर्विकार व निष्काम भाव से पोस्ट लिखें तो साइड इफ़ेक्टों से भी मुक्ति मिलती है :)

    ReplyDelete
  3. @Kajal Kumar sahi bola aapne... par aaj ki duniya me kon hai jo poorn roop se yogi hai ?

    ReplyDelete